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छात्र आंदोलन के संबंध में विश्व मानवाधिकार अनुसंधान परिषद् की चेयरपर्सन डॉ. ज्योति जोंगलुजू ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र

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Posted by WHRRC | July 22, 2026

नई दिल्ली, दिनांक 22 जुलाई 2026 । विश्व मानवाधिकार अनुसंधान परिषद् (WHRRC) की चेयरपर्सन डॉ. ज्योति जोंगलुजू ने भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को एक विस्तृत प्रतिनिधित्व (Representation) भेजकर दिनांक 20 जुलाई 2026 को देश के विभिन्न राज्यों में हुए छात्र आंदोलन, शिक्षा व्यवस्था में आवश्यक सुधार तथा राष्ट्रीय हित में सकारात्मक हस्तक्षेप का आग्रह किया है। पत्र में कहा गया है कि विद्यार्थियों का लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण ढंग से अपनी समस्याएँ रखना संविधान प्रदत्त अधिकार है तथा जब बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को आंदोलन का सहारा लेना पड़े, तो यह केवल कानून-व्यवस्था का विषय न होकर शिक्षा व्यवस्था एवं प्रशासन के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय बन जाता है।

डॉ. जोंगलुजू ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि आंदोलन का प्रभाव संसद क्षेत्र तक पहुँचना, अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए जाना इस बात का संकेत है कि विद्यार्थियों की समस्याओं के समाधान हेतु अधिक प्रभावी संवाद एवं संस्थागत शिकायत निवारण तंत्र की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद हमेशा टकराव से बेहतर समाधान होता है और सरकार तथा विद्यार्थियों के बीच समय रहते सार्थक संवाद स्थापित किया जाना आवश्यक है।

प्रतिनिधित्व में प्रधानमंत्री से आग्रह किया गया है कि छात्र प्रतिनिधियों, समाजसेवी श्री सोनम वांगचुक, शिक्षा विशेषज्ञों एवं संबंधित मंत्रालयों के साथ तत्काल उच्च-स्तरीय संवाद प्रारंभ किया जाए, शिक्षा मंत्रालय एवं संबंधित विभागों के कार्यों की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए, शांतिपूर्ण आंदोलन में शामिल विद्यार्थियों के विरुद्ध दर्ज मामलों की निष्पक्ष समीक्षा की जाए तथा देश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटों में चरणबद्ध रूप से पर्याप्त वृद्धि की जाए। साथ ही शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक राष्ट्रीय छात्र संवाद एवं शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने तथा संपूर्ण घटनाक्रम की उच्च-स्तरीय समीक्षा कर भविष्य में ऐसे आंदोलनों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक संस्थागत सुधार करने का भी अनुरोध किया गया है।

विश्व मानवाधिकार अनुसंधान परिषद् ने अपने प्रतिनिधित्व में विश्वास व्यक्त किया है कि केंद्र सरकार विद्यार्थियों के भविष्य, शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा राष्ट्रीय हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस विषय पर संवेदनशील एवं सकारात्मक निर्णय लेगी। परिषद् का मानना है कि समय पर संवाद, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं जनविश्वास ही भारत के लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाएंगे तथा विकसित भारत के संकल्प को नई मजबूती प्रदान करेंगे।

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